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धान खरीदी से पहले सरकार का बड़ा एक्शन! छत्तीसगढ़ में 273 चेकपोस्ट, अवैध धान पर रहेगी नजर

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गरियाबंद :छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होने जा रही है। खरीदी व्यवस्था में दूसरे राज्यों से अवैध धान की आवक रोकने के लिए राज्य शासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 21 अक्टूबर को जारी निर्देशों में सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने और अनियमितताओं पर कार्रवाई करने को कहा है। गरियाबंद जिले में इसके लिए 30 चेकपोस्ट बनाए गए हैं, जबकि पूरे प्रदेश में 273 चेकपोस्ट निर्धारित किए गए हैं।

गरियाबंद के 8 धान खरीदी केंद्रों पर विशेष निगरानी

शासन की सूची में गरियाबंद जिले के आठ सीमावर्ती धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। इनमें झाखरपारा, ढोर्रा, रसैला, तेतलखूंटी, दुल्ला, देवभोग, उरमाल और सीनापाली शामिल हैं। इन केंद्रों पर धान खरीदी के दौरान विशेष निगरानी रखी जाएगी।

इसका उद्देश्य दूसरे राज्यों से धान लाकर स्थानीय किसानों के पंजीकृत रकबे के माध्यम से बेचने की संभावित कोशिशों पर रोक लगाना है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहनों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

दूसरे राज्यों से धान लाने के लिए लेनी होगी अनुमति

शासन के निर्देश के अनुसार, 15 नवंबर 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक दूसरे राज्यों से धान आयात करने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के संचालक की अनुमति जरूरी होगी। हालांकि, 3,300 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक लागत वाली सुपर फाइन किस्म के धान के आयात के लिए इस अनुमति से छूट दी गई है। ऐसी स्थिति में जिला खाद्य अधिकारी अथवा खाद्य नियंत्रक को सूचना देना अनिवार्य होगा।

कोचियों और बिचौलियों पर होगी कार्रवाई

धान खरीदी व्यवस्था में गड़बड़ी रोकने के लिए गांवों और शहरी क्षेत्रों में अवैध रूप से धान खरीदने वाले कोचियों और बिचौलियों की पहचान की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति दूसरे किसानों का धान लाकर किसी पंजीकृत किसान के रकबे में बेचने की कोशिश करता है, तो संबंधित वाहन और धान जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इसके लिए कलेक्टरों को राजस्व, खाद्य, मंडी, सहकारिता, वन और परिवहन विभाग के अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

खरीदी केंद्रों और राइस मिलों के स्टॉक का होगा सत्यापन

शासन ने धान उपार्जन केंद्रों में रखे धान का भौतिक सत्यापन करने और स्टॉक का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने पर भी जोर दिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में शासकीय अवकाश को छोड़कर सोमवार से शुक्रवार तक धान खरीदी की जाएगी।

प्रत्येक शनिवार को खरीदे गए धान की मात्रा, बारदानों के उपयोग और उपार्जन के लिए प्राप्त राशि के व्यय का विवरण खरीदी सॉफ्टवेयर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। कलेक्टर प्रत्येक खरीदी केंद्र के लिए अधिकारी नामांकित करेंगे, जो मौके पर पहुंचकर धान और बारदानों के स्टॉक की जांच करेंगे।

राइस मिलों में भी सरकारी और निजी धान के भंडार, तैयार चावल तथा बिजली खपत से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। स्टॉक में अंतर या अन्य अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शासन के इन निर्देशों का उद्देश्य धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना, अवैध धान की आवक पर नियंत्रण करना और पंजीकृत किसानों के हितों की रक्षा करना है।