प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम से देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम का 139वां एपिसोड रहा। पीएम मोदी ने कहा कि मन की बात” कार्यक्रम एक तीर्थयात्रा जैसा है। पीएम मोदी ने त्योहारी सीजन का जिक्र करते हुए कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना हमारे उत्पादों को दुनिया भर के बाजारों तक पहुँचा रही है। साथ ही पीएम मोदी ने लोगों को कपास की खेती को लेकर खासा जोर दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि पंजाब में ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की एक संस्था ने ऑर्गेनिक और पारंपरिक कृषि के तौर-तरीकों को नया जीवन देना शुरू किया। इस टीम के लोग पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहते थे। इस पहल को नाम ‘नव-त्रिन्जन’ दिया गया।
पैकेजिंग पर आदिवासी कला की छाप
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग पर बहुत ध्यान दिया है। यहां ‘शबरी नेचुरल्स’ के जरिए शहद, महुआ, चीड़ और बांस से बने उत्पादों को बाज़ार में लाया जा रहा है। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की छाप देखने को मिलती है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिज़ाइन अवार्ड’ मिला है।”
स्वदेशी उत्पाद पहुंच रहे दुनिया भर के बाजारों तक
मन की बात कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “त्योहारों के इस मौसम में आप सभी ने अपने आस-पास एक बदलाव जरूर देखा होगा। अब लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को काफी महत्व देने लगे हैं। ‘वोकल फॉर लोकल’ की यह भावना हमारे उत्पादों को दुनिया भर के बाजारों तक पहुँचा रही है।”
जगह-जगह चलाएं स्वच्छता अभियान
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “दीवाली और छठ के पवित्र त्योहार बस कुछ ही दिन दूर हैं। इसके लिए जगह-जगह स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। यह जरूरी है कि हम उन जगहों को साफ रखें जहां हम रहते हैं। हमारी छोटी-छोटी कोशिशें ही हमारे आसपास बड़े बदलाव ला सकती हैं।”
प्राकृतिक जल स्रोत को बहाल करने पर जोर
‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में लोगों ने मिलकर ‘हेवल’ नदी में नई जान फूंकने की कोशिश की है। कुछ समय पहले, हेवल नदी का जलस्तर घटने लगा था और आस-पास के प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख रहे थे। इसके जवाब में स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को बचाने के लिए एक अभियान शुरू किया। इस पहल के तहत, बारिश के पानी को संचित करने, भूजल स्तर को फिर से बढ़ाने (ग्राउंडवाटर रिचार्ज) और बड़ी संख्या में पेड़ लगाने के उपाय किए गए। आज, इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, हेवल नदी फिर से जीवित हो उठी है और दर्जनों प्राकृतिक जल स्रोत भी बहाल हो गए हैं।”
बिना केमिकल की ऑर्गेनिक कपास
पीएम मोदी ने कहा कि इस पहल के तहत यहां बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है। यहां प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है, इससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अलग से केमिकल इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। आप कल्पना कर सकते हैं, इससे पर्यावरण की कितनी बड़ी मदद हो रही है।
वोकल फॉर लोकर पर जोर
पीएम मोदी ने वोकल पर लोकल का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार का मखाना और कर्नाटक की अरहर दाल को दुनिया भर में नए बाज़ार मिल रहे हैं। महाराष्ट्र के आदिवासी उत्पादों को ऐसी पैकेजिंग के ज़रिए पहचान मिल रही है, जो आदिवासी कला की समृद्धि को दर्शाती है। खादी की लोकप्रियता बढ़ रही है, जिससे उन कारीगरों को सहारा मिल रहा है जिनकी कला हमारी परंपराओं को ज़िंदा रखती है। आइए, अपने स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों को चुनकर ‘वोकल फॉर लोकल’ को मज़बूत करें।
12 साल पहले मन की बात कार्यक्रम की शुरुआत
‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “12 साल पहले विजयादहमने के पावन अवसर पर हमने ‘मन की बात’ की शुरुआत की थी। तब से, हमारा यह सफर बिना रुके लगातार जारी है। इस सफर में आप सभी मेरे सहयात्री भी रहे हैं और मार्गदर्शक भी। मेरे लिए, ‘मन की बात’ हमारे देश के आम लोगों की कड़ी मेहनत, साहस, संकल्प, समर्पण और सेवा-भाव का जश्न मनाने का एक शानदार अवसर रहा है। हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। मेरे लिए, ‘मन की बात’ किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है—यह एक ऐसी यात्रा है, जिसके ज़रिए मैं देशवासियों के प्रयासों को करीब से समझ पाता हूँ और उनके योगदान के प्रति सम्मान प्रकट कर पाता हूँ।”



