Dhanteras 2026 Date, Puja Muhurat: दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन उनकी पूजा कर अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना की जाती है। इसके साथ ही मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना भी की जाती है।
धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है। वहीं, पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। लेकिन आखिर सूर्यास्त के आसपास के इस समय में पूजा करना शुभ क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं धार्मिक मान्यता, धनतेरस 2026 की तिथि और पूजा के शुभ मुहूर्त से जुड़ी जानकारी।
प्रदोष काल में क्यों की जाती है धनतेरस की पूजा?
प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय होता है। धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि को पूजा-पाठ और दीपदान के लिए शुभ माना गया है। धनतेरस के अवसर पर इसी समय मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन हुआ था। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर उनकी पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की जाती है।
मां लक्ष्मी की पूजा का उद्देश्य धन-धान्य और समृद्धि की कामना करना है। इस दिन घर में दीप जलाने और स्वच्छता बनाए रखने की भी परंपरा है। इन मान्यताओं के कारण धनतेरस पर शाम के समय पूजा और दीपदान को विशेष स्थान दिया जाता है।
धनतेरस 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि का समय इस प्रकार बताया गया है:
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026, सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
धनतेरस पर्व: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
धार्मिक परंपरा के अनुसार, धनतेरस की पूजा के लिए तिथि के साथ प्रदोष काल और स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ मुहूर्त को भी ध्यान में रखा जाता है।
धनतेरस 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए निम्न समय बताए गए हैं:
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक
वृषभ काल: शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक
पूजा की तैयारी समय से पहले कर लें, ताकि निर्धारित मुहूर्त में श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जा सके। ध्यान दें कि पूजा के समय में शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। अपने क्षेत्र के लिए समय की पुष्टि अवश्य करें।
धनतेरस 2026 पर खरीदारी कब करें?
धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। इस दिन लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार बर्तन, सोना-चांदी, आभूषण और घरेलू उपयोग की चीजें खरीदते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं की खरीदारी को शुभ शुरुआत और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी। हालांकि, केवल तिथि के आधार पर पूरे दिन को एक समान शुभ मुहूर्त मानना उचित नहीं है। सोना-चांदी या अन्य वस्तुओं की खरीदारी के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए खरीदारी मुहूर्त की पुष्टि करें।
धनतेरस पर इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस के दिन घर की साफ-सफाई, दीपदान और पूजा की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पूजा में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर का स्मरण किया जा सकता है। खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के अनुसार करें। धार्मिक मान्यताओं में इस पर्व को स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना गया है।



