पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर फैसल रजा आबिदी ने एक बार फिर अपने विवादित बयानों से हलचल मचा दी है. हाल ही में एक राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल पर उन्होंने यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से अपील की कि वे इजरायल के साथ-साथ भारत पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले करें.
उनका यह बयान न केवल पाकिस्तान और भारत के राजनीतिक गलियारों में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गया है.
आबिदी ने अपने बयान में भारत को यहूदियों का सबसे बड़ा समर्थक करार दिया और आरोप लगाया कि भारत गाजा में चल रहे संघर्ष के दौरान इजरायल को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है. हालांकि, उनके इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में पहले भी ऐसे बयान दिए जाते रहे हैं जो भारत के खिलाफ धार्मिक और भड़काऊ आरोप लगाते हैं.
भारत और इजरायल के संबंधों को मुस्लिम विरोधी रंग देने की कोशिश
फैसल रजा आबिदी ने अपने बयान में कहा कि भारत और इजरायल इस्लाम के दुश्मन हैं और इन दोनों देशों की रणनीति मुस्लिम हितों के खिलाफ है. उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत और इजरायल के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों के कारण नई दिल्ली अब सीधे तौर पर गाजा युद्ध में इजरायल का समर्थन कर रहा है.
हालांकि, यह तथ्य है कि भारत और इजरायल रक्षा, प्रौद्योगिकी और सैन्य सहयोग के क्षेत्र में सालों से भागीदार हैं. भारत ने इजरायल से मिसाइल रक्षा प्रणाली, ड्रोन और अन्य रक्षा उपकरण खरीदे हैं, लेकिन गाजा युद्ध के संदर्भ में भारत की ओर से इजरायल को हथियारों की प्रत्यक्ष आपूर्ति के कोई प्रमाण नहीं हैं.
हूती विद्रोही कौन हैं और वे कितने खतरनाक हैं?
फैसल रज़ा आबिदी ने जिस हूती विद्रोही गुट से भारत पर हमला करने की अपील की है, वह यमन का ईरान समर्थित एक शिया विद्रोही संगठन है, जिसे अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है. यह गुट 2014 से यमन में सत्ता के लिए संघर्ष कर रहा है और हाल ही में इजरायल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ हमलों के कारण चर्चा में आया है. हूती विद्रोहियों ने गाजा युद्ध के बाद इजरायल पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें से अधिकांश को इजरायली या अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने निष्क्रिय कर दिया.
हूती विद्रोही अपने कुद्स क्रूज मिसाइल और सामद-सीरीज ड्रोन के लिए जाने जाते हैं, जो दावा किया जाता है कि 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक की दूरी तक मार कर सकते हैं. इस तकनीक का उपयोग कर वे इजरायल और रेड सी में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना चुके हैं.
क्या हूती विद्रोही वास्तव में भारत पर हमला कर सकते हैं?
भौगोलिक दृष्टि से, भारत यमन से लगभग 2,500 किलोमीटर दूर है, जो उनके मिसाइलों की अधिकतम सीमा में आता है. हालांकि, यह तकनीकी रूप से एक जटिल और जोखिम भरा मिशन होगा, क्योंकि भारत की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के कारण हूती विद्रोहियों के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा.
भारत पर हमले की संभावना और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
फैसल रज़ा आबिदी का बयान पाकिस्तान के भीतर एक विवादास्पद मुद्दा बन गया है. कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है, क्योंकि हूती विद्रोही अभी तक भारत को अपने दुश्मनों की सूची में शामिल नहीं करते हैं.
हालांकि, यदि इस बयान को गंभीरता से लिया जाए, तो यह भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकता है. अगर हूती विद्रोही भारत पर हमला करने की कोशिश करते हैं, तो यह मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में एक नए प्रकार के संघर्ष को जन्म दे सकता है. भारत की सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही इस मामले पर सतर्क हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सरकार इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती है.