नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने मंगलवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लोकसभा में पेश कर दिया। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यदि यह संशोधन नहीं लाया जाता, तो संसद भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित हो सकती थी।
उन्होंने 2013 और 2014 में वक्फ संपत्तियों को लेकर हुए सरकारी फैसलों पर सवाल उठाए और कहा कि यह बदलाव समय की जरूरत थी।
रिजिजू ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत वक्फ बोर्ड में दो महिला सदस्यों का होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक प्रबंधन में सरकार अब कोई दखल नहीं देगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मस्जिदों के प्रबंधन में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
कानून मंत्री ने केरल हाईकोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की वक्फ से संबंधित टिप्पणियों का हवाला दिया और कहा कि “2013 में चुनाव से पहले 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया गया था। यह बदलाव सिर्फ वोटबैंक की राजनीति के लिए किया गया था, लेकिन अब देश के लोग समझदार हो गए हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि 1995 तक वक्फ संपत्तियों की पहचान का अधिकार सीमित था, लेकिन 2013 में यह प्रावधान बदल दिया गया, जिससे कोई भी व्यक्ति संपत्तियों को वक्फ घोषित करने में सक्षम हो गया। नए विधेयक में पुराना प्रावधान बहाल किया गया है, जिसके तहत सिर्फ वही व्यक्ति वक्फ संपत्तियों की पहचान कर सकता है, जिसने कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन किया हो।
रिजिजू ने कहा कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल में कुल 22 सदस्य होंगे, जिनमें अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं। इसके अलावा, तीन सांसद होंगे,10 सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे,दो पूर्व जज शामिल होंगे, एडिशनल सेक्रेटरी या जॉइंट सेक्रेटरी की भी इसमें भूमिका होगी। इसी तरह, स्टेट वक्फ बोर्ड में 11 सदस्य होंगे, जिनमें अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम हो सकते हैं। इसके अलावा एक सांसद और एक विधायक को इसमें जगह मिलेगी। एक सदस्य बार काउंसिल से होगा। चार सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिनमें एक महिला का होना अनिवार्य होगा।
रिजिजू ने कहा कि भारतीय रेलवे और रक्षा विभाग के बाद, वक्फ बोर्ड के पास देश का तीसरा सबसे बड़ा लैंडबैंक है। उन्होंने बताया कि ट्रिब्यूनल में वक्फ संपत्तियों से जुड़े 10 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जो जल्द ही 30 हजार तक पहुंच सकते हैं।
“यह विधेयक लाकर हमने इन विवादों को सुलझाने की दिशा में कदम उठाया है,” रिजिजू ने कहा इस विधेयक पर विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध जताया। कांग्रेस, टीएमसी और AIMIM ने इसे मुस्लिम विरोधी बताया, जबकि सरकार ने इसे लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने का प्रयास करार दिया।
लोकसभा में इस विधेयक पर आज आठ घंटे तक बहस चलेगी। एनडीए को इस पर चर्चा के लिए 4 घंटे 40 मिनट का समय दिया गया है, जबकि विपक्ष को 3 घंटे 20 मिनट का वक्त मिला है।
लोकसभा की कुल सीटें 543 हैं. इसमें बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन चाहिए. एनडीए के पास अभी 293 सांसद हैं, जिसमें बीजेपी के 240 सांसद शामिल हैं. इसके अलावा जेडीयू के 12, टीडीपी के 16, एलजेपी के 5, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7 और अन्य छोटे सहयोगियों के सदस्य शामिल हैं. यह संख्या बहुमत से 21 ज्यादा है. जेडीयू और टीडीपी जैसे बड़े सहयोगियों ने बिल का समर्थन करने का संकेत दिया है. इससे लोकसभा में इसे पास कराना एनडीए के लिए आसान लग रहा है. हालांकि, विपक्षी दल जैसे कांग्रेस, सपा, टीएमसी और AIMIM इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं. लेकिन इनकी कुल संख्या 250 से कम है।
राज्यसभा की मौजूदा प्रभावी ताकत 234 है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की चार सीटें खाली हैं. इसमें बहुमत के लिए 118 सांसद चाहिए. बीजेपी के पास उसके अपने 96 सांसद हैं और एनडीए के सहयोगियों के साथ कुल संख्या 113 तक पहुंचती है. इसमें जेडीयू के 4, टीडीपी के 2, और अन्य छोटे दलों के सांसद शामिल हैं. इसके अलावा छह मनोनीत सदस्य हैं, जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में वोट करते हैं. इससे एनडीए की ताकत 119 हो जाती है जो बहुमत से दो ज्यादा है. हाल ही में हुए उपचुनावों और बीजेडी व वाईएसआरसीपी के कुछ सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से यह स्थिति बनी है. लेकिन यह बहुमत बहुत मामूली है।
अगर कुछ सांसद गैरहाजिर रहते हैं या विरोध में वोट करते हैं तो सरकार के लिए मुश्किल हो सकती है. दूसरी ओर विपक्ष में कांग्रेस के पास 27 सांसद हैं. अन्य विपक्षी दलों के पास 58 सदस्य हैं. इस तरह राज्यसभा में कुल विपक्षी सांसदों की संख्या 85 तक पहुंचती है. यानी सारा दारोमदार बीजेडी और वाईएसआर के रुख पर टिका है. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले इन दोनों दलों ने कई मौकों पर सरकार का साथ दिया था. लेकिन, इन दोनों के राज्यों आंध्र प्रदेश और ओडिशा में राजनीतिक स्थित बदल गई है. ये दोनों पार्टियां अपने-अपने राज्यों में भाजपा और एनडीए के सहयोगी दलों के हाथों सत्ता से बाहर हुई हैं।
वक्फ संशोधन बिल एक सामान्य विधेयक है, जिसे पास करने के लिए दोनों सदनों में साधारण बहुमत (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का आधे से ज्यादा) चाहिए. लोकसभा में 543 सदस्यों के साथ, अगर सभी मौजूद हों, तो 272 वोट चाहिए. लेकिन मतदान के दौरान संख्या कम हो सकती है, जिससे जरूरी वोटों की संख्या भी घट सकती है. एनडीए के 293 सांसदों के साथ यह लक्ष्य आसानी से हासिल हो सकता है. राज्यसभा में 234 की प्रभावी संख्या के साथ, कम से कम 118 वोट चाहिए. एनडीए के पास 119 हैं, लेकिन यह संतुलन नाजुक है. बीजेडी (7 सांसद) और वाईएसआरसीपी (9 सांसद) जैसे गैर-गठबंधन दलों का रुख अभी अस्पष्ट है. अगर ये विपक्ष के साथ गए, तो एनडीए को मुश्किल हो सकती है।