रायपुर: श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज मान्यता रिश्वतकांड में सीबीआई की प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि रविशंकर महाराज (रावतपुरा सरकार) टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआइएसएस) के चेयरमैन डीपी सिंह से सीधे रिश्वत के लिए सौदेबाजी कर रहे थे। डीपी सिंह यूजीसी के पूर्व चेयरमैन के साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शिक्षा सलाहकार और बीएचयू, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय, इंदौर और सागर विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं।
इस मामले के आरोपियों में छत्तीसगढ़ के सेवानिवृत्त आईएफएस अफसर और रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के अध्यक्ष संजय शुक्ला भी हैं। वे रावतपुरा कॉलेज से भी जुड़े हैं। अब तक केवल कॉलेज के निदेशक अतुल तिवारी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि रविशंकर महाराज, संजय शुक्ला, लेखापाल लक्ष्मीनारायण तिवारी और डॉ. अतिन कुंडू सीबीआइ की गिरफ्त से बाहर हैं।
डॉ. सतीश ने हवाला ऑपरेटर के जरिए मिले 55 लाख रुपये बेंगलुरू में चैत्रा के पति रविचंद्रन के साथ जाकर एकत्र किया था। इस बीच भनक लगने पर एक जुलाई को सीबीआई ने डॉ. मंजप्पा, डॉ. चैत्रा एमएस, डॉ. अशोक शेलके और अतुल तिवारी को रायपुर और डॉ.सतीश व रविचंद्रन को बेंगलुरू में घेराबंदी कर दबोच लिया।
मेडिकल कॉलेजों की मान्यता में भ्रष्टाचार
1,300 करोड़ से अधिक का रिश्वतकांड नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा मेडिकल कॉलेज सीबीआइ जांच की सूची में शीर्ष पर है, जिसने रिश्वतखोरी के बदले मान्यता लेने की कोशिश की। इनके साथ ही कॉलेज से जुड़े अन्य पदाधिकारियों की भी जल्द गिरफ्तारी के संकेत हैं।
सूत्रों का कहना है कि देशभर के आठ राज्यों के निजी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के नाम पर 1,300 करोड़ रुपये से अधिक के रिश्वत लेने के प्रमाण सीबीआई की जांच में सामने आए हैं। जांच की जद में आए श्री रावतपुरा कॉलेज के पांच प्रमुख पदाधिकारियों के साथ एनएमसी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के 11 अधिकारियों समेत 35 नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है।




