नई दिल्ली : हम सभी राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका के रूप में जानते हैं। राधा अष्टमी के दिन राधा जी की पूजा मध्याह्न काल में की जाती है। इस दिन पर कई साधक व्रत भी करते हैं। ऐसे में अगर आप भी राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2025 Katha) का व्रत कर रहे हैं, तो उनकी अवतरण कथा जरूर पढ़ें, ताकि आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
पढ़ें पौराणिक कथा
राधा रानी के अवतरण की एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार वृषभानु जी एक बार सरोवर पर गए, तब उन्हें वहां एक सुनहरे कमल पर एक दिव्य कन्या लेटी हुए दिखाई दी। वह उस कन्या को अपने घर ले आए और उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। लेकिन जन्म के कई समय तक उस कन्या ने अपनी आंखें नहीं खोलीं।
असल में वह कान्हा जी के जन्म की प्रतीक्षा में थीं और सबसे पहले श्रीकृष्ण को देखना चाहती थीं। जब बाल रूप में राधा जी की भेंट कान्हा जी से हुई, तब उन्होंने अपनी आंखें खोल दी। यह देखकर वृषभानु व उनकी पत्नी कीर्तिदा (या कीर्ति) बहुत ही प्रसन्न हुए।
वरदान के अनुसार, कालांतर में जब सूर्यदेव ने बृज भूमि में वृषभानु महाराज के रूप में जन्म लिया और उनके यहां पुत्री के रूप में राधा जी का जन्म हुआ।




