पलामू. हुसैनाबाद प्रखंड के प्रियरंजन कुमार इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. उन्होंने अपने खेतों में असम की खास वेराइटी जोहा धान की खेती शुरू की है, जो किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. प्रियरंजन सिंह ने बताया कि असम में आयोजित 15 दिवसीय किसान मेले में उन्होंने इस विशेष धान के बारे में जाना वहां उन्हें जानकारी मिली कि जोहा धान को जीआई टैग प्राप्त है और इसकी कई अनूठी खूबियां हैं. खास बात यह है कि यह धान शुगर फ्री है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है. यही वजह है कि मधुमेह के मरीज भी इसे सुरक्षित रूप से खा सकते हैं. इसके अलावा इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है.
उन्होंने अपने खेत में 1 एकड़ में जोहा धान लगाया है, जिस पर करीब 30 हजार रुपये का खर्च आया. प्रियरंजन बताते हैं कि यह धान सामान्य धान की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक उत्पादन देता है. साथ ही इसकी खेती से सेहतमंद धान की पैदावार होती है, जिससे बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है. जोहा धान की खासियत यह है कि इसकी फसल 140 से 160 दिनों में तैयार हो जाती है. जिससे दोगुना मुनाफा होता है.
जैविक विधि से करते हैं खेती
प्रियरंजन सिंह ने आगे बताया कि इसकी खेती पूरी तरह जैविक विधि से खेती करते हैं. उनका कहना है कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वह रासायनिक उर्वरक की जगह गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक घोल का इस्तेमाल करते हैं. इससे जहां उत्पादन में शुद्धता आती है वहीं मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है.
प्रियरंजन सिंह ने आगे बताया कि इसकी खेती पूरी तरह जैविक विधि से खेती करते हैं. उनका कहना है कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वह रासायनिक उर्वरक की जगह गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक घोल का इस्तेमाल करते हैं. इससे जहां उत्पादन में शुद्धता आती है वहीं मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है.
प्रियरंजन का कहना है कि इस बार वह इसे छोटे पैमाने पर आजमा रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में इसे बड़े पैमाने पर उगाने की योजना है. उनका मानना है कि अगर इसे वृहद स्तर पर लगाया गया तो लाखों रुपये की कमाई संभव है.




