नई दिल्ली : मुस्लिम लीग ने 1939 में सरदार वल्लभभाई पटेल पर दो घातक जानलेवा हमलों की साजिश रची थी, लेकिन कांग्रेस ने इन घटनाओं को ”चुपचाप” 86 वर्षों तक दबाए रखा क्योंकि यह ”असुविधाजनक सत्य” था। 1939 के इस काले सच को सत्तारूढ़ भाजपा ने तब उजागर किया है जब देश सरदार पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है, जबकि कांग्रेस इसे इंदिरा गांधी की 41वीं पुण्यतिथि के रूप में भी मना रही है।
भाजपा ने शुक्रवार को एक्स हैंडल पर हमलों से संबंधित समाचार क्लिपिंग और अन्य दस्तावेज साझा कर कहा, ”1939 में मुस्लिम लीग ने सरदार वल्लभभाई पटेल पर दो घातक हमलों की साजिश रची और कांग्रेस ने चुपचाप इसे दबा दिया।”
भाजपा ने कहा कि जानलेवा हमलों के 57 में से 34 आरोपितों को दोषी ठहराया गया और दो को विशेष अदालत द्वारा मौत की सजा दी गई। इनमें से एक हमले में दो ”देशभक्त” सरदार पटेल की रक्षा करते हुए शहीद हुए जबकि दर्जनों घायल हुए, लेकिन ”कांग्रेसी इतिहासकारों” ने मामले को पाठ्यपुस्तकों और अभिलेखागार से मिटा दिया।
अगले दिन सरदार पटेल ने शांति की अपील की। तत्कालीन वडोदरा शासन ने फर्जी जांच की और मामला बंद कर दिया। जबकि मुस्लिम लीग के गुंडे भावनगर में और घातक साजिश रच रहे थे।
दूसरी घटना-14 मई, 1939 को मुस्लिम लीग से जुड़ी एक भीड़ ने सरदार पटेल के शांतिपूर्ण जुलूस पर हमला किया। जब वह पांचवें प्रजा परिषद का नेतृत्व करने आए थे, तब स्थानीय रियासत के समर्थन से इस पूर्व नियोजित साजिश को अंजाम दिया गया।
सरदार पटेल की रक्षा करते हुए देशभक्त बच्चू वीरजी और जादवजी मोदी शहीद हुए। दर्जनों घायल हुए। फिर भी पटेल ने उस शाम सभा को शांति और श्रद्धांजलि के साथ संबोधित किया। इतनी हिंसा के बावजूद सरदार पटेल ने एकता के मार्ग को कभी नहीं छोड़ा।




