मुंबई : इन दिनों सैयारा से लेकर एक दीवाने की दीवानियत तक जुनूनी इश्क की कहानी दर्शकों को लुभा रही है। अब उसमें तेरे इश्क में भी जुड़ गई है। साल 2013 में रिलीज हुई रांझणा की ही दुनिया की यह कहानी है, जो फिर आशिक को इश्क में फनाह कर देती है। इस बार इश्क में अकेला लड़का नहीं पड़ेगा, लड़की की भी बारी आ गई है। इश्क में पड़ने से पहले शंकर वार्निंग दे देता है कि मैं इश्क में पड़ा, तो दिल्ली जला दूंगा, वहां से कहानी का रुख समझ आ जाता है।
शंकर का पहले वकालत करना, फिर उसे छोड़कर यूपीएससी की परीक्षा देना फिर एयरफोर्स में तेजस उड़ाने का सफर भी हजम नहीं होता है। दूसरों की काउंसलिंग करने वाली मुक्ति का खुद को न संभाल पाना भी अटपटा है। इन सबके बावजूद इसे सिनेमाई लिबर्टी का नाम देते हुए आनंद एल राय का निर्देशन, फिल्म के कलाकारों का अभिनय और जुनूनी इश्क की कहानी को देखने का मन करेगा। इस बार इश्क में अकेले जलने वालों में लड़का ही नहीं, बल्कि लड़की भी शामिल है।
मुक्ति और शंकर का सात साल बाद मिलने वाला पहला सीन, मुक्ति के पिता का शंकर को कहना घर के बाहर लगा बोर्ड फिर पढ़कर आ, पिता (प्रकाश राज) के शव के सामने बैठे शंकर का अपने पिता के गाल पर हाथ फेरकर चेक करना की कहीं वो जिंदा तो नहीं जैसे कई सीन फिल्म में हैं, जिसे दोबारा देखने का मन करेगा। रांझणा से जोड़ने के लिए आनंद एल राय उस फिल्म से मुरारी (मोहम्मद जीशान अयूब) को ले आए हैं।
धनुष और कृति की जोड़ी हुई सुपरहिटअभिनय ही बात करें, तो पूरी फिल्म कलाकारों के कंधों पर टिकी हुई है। धनुष का तीर एक्टिंग के मामले में एक बार सही लगता है। जुनूनी और दिलजले आशिक, पिता के आखरी सपने को पूरा करने वाले बेटे हर सीन में वह दमदार लगे हैं। जब वह डायलाग्स बोलते हैं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कृति सेनन न केवल सुंदर लगी हैं, बल्कि अभिनय में एक कदम आगे बढ़ गई हैं। देर से प्यार का अहसास होने की सजा भुगतने वाली लड़की के दृश्यों में वह प्रभावित करती हैं। बेटे के लिए कुछ भी कर गुजरने वाले पिता की भूमिका में प्रकाश राज ने जान डाल दी है। सख्त लेकिन बेटी के लिए सही फैसला लेने वाले पिता की भूमिका में टोटा राय चौधरी याद रह जाते हैं। मोहम्मद जीशान अयूब मुरारी के रोल से रांझणा की दुनिया में ले जाते हैं। विनीत कुमार सिंह छोटे, लेकिन महत्वपूर्ण रोल में यादगार परफार्मेंस देते हैं।




