मऊ: आज के समय में किसान ऐसी फसलों की तलाश में रहते हैं, जिनसे कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिल सके. पारंपरिक खेती के साथ अगर किसान थोड़ी समझदारी और नई फसलों को अपनाएं, तो उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है. ऐसी ही एक फसल है छप्पन कद्दू (ज़ुकिनी), जिसकी बाजार में कीमत ₹600 से ₹700 प्रति किलो तक पहुंच रही है. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.
ज़ुकिनी ने बनाई अलग पहचान
छप्पन कद्दू को लोग ज़ुकिनी के नाम से भी जानते हैं. उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के घोसी तहसील क्षेत्र के पकड़ी बुजुर्ग गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान रामलेश मौर्य ने इस कद्दू की खेती कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है. उन्होंने बताया कि वह अलग-अलग वैरायटी के कद्दू की खेती कर रहे हैं और इससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है.
रामलेश मौर्य बताते हैं कि अगर छप्पन कद्दू की खेती सही समय पर की जाए, तो यह फसल किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है. उन्होंने तीन तरह की वैरायटी लगाई है, जिसमें एक पीले रंग का कद्दू, एक हरे रंग का और एक गोल वैरायटी शामिल है.
60 दिनों में शुरू हो जाती है हार्वेस्टिंग
छप्पन कद्दू की खेती अक्टूबर महीने में की जाती है. फसल लगाने के 45 से 50 दिनों के भीतर इसमें फूल आना शुरू हो जाता है. करीब 60 दिनों के बाद इसकी हार्वेस्टिंग शुरू हो जाती है. एक पौधे से लगभग 12 फल निकलते हैं. एक फल का वजन डेढ़ किलो से लेकर 3 किलो तक होता है.
पीले रंग के कद्दू की बाजार में खास मांग रहती है. सर्दियों के मौसम में लोग इसे सलाद के रूप में खाना पसंद करते हैं. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ काफी पौष्टिक भी होता है. यही वजह है कि पीला कद्दू ₹600 से ₹700 प्रति किलो तक बिक जाता है. वहीं हरे रंग का कद्दू ₹30 से ₹40 प्रति किलो के भाव से बाजार में बेचा जा रहा है.
₹700 की लागत, ₹21000 से ज्यादा की कमाई
किसान रामलेश मौर्य ने बताया कि उन्होंने लगभग तीन बिस्वा जमीन में छप्पन कद्दू की खेती की है. इसमें उनकी कुल लागत करीब ₹700 आई है. अब तक 5 से 7 कुंतल तक कद्दू की हार्वेस्टिंग हो चुकी है. इससे ₹21000 से ज्यादा की कमाई हो चुकी है. यह फसल जनवरी महीने तक फल देती रहेगी, जिससे आगे और मुनाफा होने की उम्मीद है.
कीटों से बचाव जरूरी
उन्होंने बताया कि पीले रंग के कद्दू पर मक्खियों के डंक मारने का असर ज्यादा देखने को मिलता है. इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए अलग से इंतजाम करना जरूरी होता है. अगर समय रहते कीटों से बचाव किया जाए, तो फसल सुरक्षित रहती है और मुनाफा भी अच्छा मिलता है.
छप्पन कद्दू की खेती उन किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है, जो कम समय में ज्यादा आमदनी करना चाहते हैं. सही तकनीक, समय पर बुआई और देखभाल से यह फसल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती है.




