वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर वसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन सरस्वती पूजन किया जाता है। साथ ही फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सरस्वती पूजन करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है और मां सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहती है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा में विशेष चीजों को शामिल न करने से पूजा सफल नहीं होती है। ऐसे में आइए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि सरस्वती पूजन में किन चीजों को शामिल करने से शुभ परिणाम मिलते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, 23 जनवरी को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा।
माघ की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत- 23 जनवरी को सुबह 02 बजकर 28 मिनट पर
माघ की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का समापन- 24 जनवरी को सुबह 01 बजकर 46 मिनट पर
पूजा करने का शुभ मुहूर्त- सुबह 07 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 26 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से 03 बजकर 02 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 50 मिनट से 06 बजकर 17 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक
अमृत काल- 07 बजकर 24 मिनट से 09 बजकर 10 मिनट तक
सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 13 मिनट
सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 53 मिनट
चंद्रोदय का समय: 24 जनवरी को 02 बजकर 34 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर
- तुलसी दल
- हल्दी
- आम का पत्ता
- एक लोटा जल के लिए
- एक लकड़ी की चौकी
- पीले रंग का कपड़ा
- कलावा या मौली
- घी का दीपक
- अगरबत्ती
- बेसन के लड्डू, बूंदी, मोतीचूर के लड्डू
- पीले रंग के फूल और माला
- मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति
- सफेद चंदन, रोली, सिंदूर
- एक पान, सुपारी, छोटी इलायची, लौंग




