Home अन्य किसान सरसों की पैदावार बढ़ाने के लिए अपनाएं ये धांसू तरीका, तुरंत...

किसान सरसों की पैदावार बढ़ाने के लिए अपनाएं ये धांसू तरीका, तुरंत बन जाएंगे मालामाल

13
0
कृषि विज्ञान केंद्र, सीतामढ़ी द्वारा किसानों को सरसों की वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी जा रही है, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सके. केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार ने बताया कि सीतामढ़ी जिला सरसों की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु दोनों दृष्टि से बेहद उपयुक्त है, लेकिन संतुलित पोषक तत्वों का सही ढंग से प्रयोग नहीं होने के कारण किसान अपेक्षित उत्पादन नहीं ले पा रहे हैं. सरसों की बुआई से पहले मिट्टी की जांच कराना किसानों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. जिससे यह पता चल सके कि खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है और उसी अनुसार उर्वरक का प्रयोग किया जा सके.
वैज्ञानिकों के अनुसार सरसों की फसल में सल्फर का विशेष महत्व है. सल्फर के प्रयोग से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि तेल की मात्रा और गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है. रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरकों का प्रयोग भी जरूरी है. पीएसबी और एजोटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरक अपनाने से सरसों की उपज में लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है. नोडल अधिकारी व शस्य वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद ने कहा कि जिले में तेलहन फसलों का क्षेत्रफल घटने से लोगों को शुद्ध सरसों का तेल आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. इसलिए किसानों को धान, गेहूं और दलहन के साथ-साथ सरसों की खेती भी जरूर करनी चाहिए, जिससे शुद्ध तेल का उत्पादन बढ़े और किसानों की आय में भी इजाफा हो.
1एकड़ में करें दो किलोग्राम बीज का प्रयोग
खाद, बीज और खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है. वैज्ञानिकों ने बताया कि सरसों की बुआई के लिए प्रति एकड़ दो किलोग्राम बीज का प्रयोग करें. बुआई से पहले बीज उपचार बेहद जरूरी है. इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज पर दो ग्राम कार्बेन्डाजिम का प्रयोग करने से फसल में रोगों का प्रकोप नहीं होता है. बुआई के तुरंत बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए पेन्डीमेथालीन 30 ईसी की पांच एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. जिससे शुरुआती अवस्था में खरपतवार नहीं उगते और फसल को पर्याप्त पोषण मिलता है.
 
खेत में उर्वरक डालकर बढ़ाएं सरसों की पैदावार
सिंचाई और फसल सुरक्षा को भी उत्पादन बढ़ाने में अहम माना गया है. वैज्ञानिकों ने बताया कि सरसों की फसल में दो बार सिंचाई अनिवार्य है. पहली सिंचाई फूल आने से पहले और दूसरी फली बनने से पहले करनी चाहिए. पहली सिंचाई के समय प्रति कठ्ठा डेढ़ किलोग्राम यूरिया का छिड़काव करने से फसल की बढ़वार बेहतर होती है. इसके साथ ही प्रति लीटर पानी में एक एमएल यूमिक एसिड का प्रयोग करने से पौधों का विकास तेज होता है. यदि फसल में लाही कीट दिखाई दे तो तुरंत इमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत की एक एमएल मात्रा को दो लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. बुआई के समय खाद एवं उर्वरक के रूप में प्रति कठ्ठा पांच किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट, एक किलोग्राम यूरिया, एक किलोग्राम पोटाश और आधा किलोग्राम सल्फर का प्रयोग करने से सरसों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है.