नई दिल्ली : यूजीसी के नए नियमों का विरोध तेज होता जा रहा है। बुधवार को भी कई राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए। उत्तर प्रदेश में कई जगह भाजपा कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया तो दिल्ली में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में जोरदार प्रदर्शन हुआ। खास बात यह रही कि डीयू में एससी-ओबीसी वर्ग के छात्र भी सवर्ण छात्रों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए और इसे विश्वविद्यालय की समरसता के लिए घातक बताया।
वाराणसी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों के प्रदर्शन के कारण वाहनों की लंबी कतार लग गई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों, करणी सेना और भारतीय किसान मजदूर संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने शहर में शांतिपूर्ण रैली निकालने की कोशिश की पर पुलिस ने परिसर तक ही सीमित कर दिया।
पीलीभीत में सिर मुंडवाकर विरोध प्रकट किया गया। राजस्थान के जोधपुर में सवर्ण समाज ने एक फरवरी को जोधपुर बंद का आह्वान किया है। हिमाचल प्रदेश में भी यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रदर्शन हुए।
शिमला में देवभूमि क्षत्रिय संगठन व राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने हथकड़ी व जंजीरें बांधकर प्रदर्शन किया और भाजपा के प्रदेश कार्यालय का किया घेराव करने के साथ हिमाचल बंद करने की चेतावनी दी।
हमीरपुर में राजपूत महासभा व सवर्ण समाज ने रैली निकाली और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इस बीच, राज्य के राजस्व एवं जनजातीय विकास विभाग मंत्री जगत सिंह नेगी ने विरोध प्रदर्शन को भाजपा प्रायोजित बताया है तो लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य ¨सह ने इंटरनेट मीडिया के जरिये इस मुद्दे लोगों की राय मांगी है।
एससी वर्ग से आने वालीं छात्रा साक्षी ने कहा, मेरी चिंता यह है कि इस नए यूजीसी विधेयक के बाद कहीं ऐसा न हो कि आपसी संवाद और मित्रता की जगह संदेह व वर्गीकरण हावी हो जाए। ओबीसी वर्ग से ही आने वाले पीएचडी के छात्र शुभम ने भी चिंता जताई कि नए नियम जातिगत विभाजन को एक ठोस आधार देने का काम करेगा।
उन्होंने यह भी लिखा है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने से पहले यदि सभी लोगों को विश्वास में ले लिया जाता तो बेहतर होता, ऐसे में यह देश में सामाजिक तनाव का कारण नहीं बनता। इस तरफ भी सरकार और सभी संस्थानों को जरूर ध्यान देना चाहिए।




