वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। यह दिन महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। इस अवसर पर शिव मंदिरों में शिव पूजन किया जाता है। वहीं, उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और महाकाल की भस्म आरती होती है। यहां रोजाना महाकाल की आरती 6 बार होती है। भस्म आरती ही सबसे अधिक प्रसिद्ध है।
इस आरती में शामिल और महाकाल के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं, लेकिन इस आरती में महिलाओं को शामिल होने की अनुमति नहीं है। अब आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि आखिर किस वजह से महिलाओं को महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने की मनाही है। आइए आपको बताते हैं इसकी वजह के बारे।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक, भस्म आरती के दौरान महाकाल का रूप बेहद उग्र और शक्तिशाली होता है। इसलिए महाकाल की भस्म आरती को लेकर महिलाओं के लिए नियम बनाए गए हैं।
महाकाल की भस्म आरती का धार्मिक महत्व महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा है। श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यह आरती रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में होती है। इस आरती में शामिल होने से अकाल मृत्यु का भय से मुक्ति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में महादेव ने राक्षस दूषण का वध कर उसकी भस्म से शृंगार किया था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
- महाकाल की भस्म आरती के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य है।
- आरती करने के लिए पुरुषों के लिए धोती पहनना जरूरी है। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि धोती सिली हुई नहीं होनी चाहिए।
- आरती के दौरान महिलाओं को घूंघट करना होता है।
- इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग की जाती है।
- आरती शुरू होने के बाद गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया जाता है।
- मोबाइल फोन, कैमरे, चमड़े की चीजें ले जाने की अनुमति नहीं है।




