नई दिल्ली : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव में चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, मगर पांचवीं सीट का समीकरण दिलचस्प हो गया है। हार-जीत का पूरा गणित असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पांच विधायकों की भूमिका पर टिक गया है।
एआईएमआईएम के सभी विधायक मतदान में हिस्सा लेकर महागठबंधन के पक्ष में वोट करते हैं तो एनडीए की जीत मुश्किल हो सकती है। जबकि उनके मतदान से दूर रहने की स्थिति में एनडीए के लिए रास्ता आसान हो जाएगा। इस बीच ओवैसी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली बुलाया है, जिससे संकेत मिलता है कि अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष स्तर पर होगा।
इस आधार पर पांच सीटों के लिए कुल 205 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों को मिलाकर 202 विधायक हैं। इस संख्या से वह चार सीटें आराम से जीत सकता है, क्योंकि इसके लिए 164 वोट पर्याप्त हैं। चार सीटों के बाद एनडीए के पास 38 विधायक बचते हैं, जिससे पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
हालांकि राजनीतिक समीकरण इतने सरल नहीं हैं। विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम ने राजद के साथ गठबंधन की कोशिश करते हुए मात्र छह सीटों की मांग की थी, लेकिन उसे महत्व नहीं मिला। पिछले विधानसभा में एआईएमआईएम के पांच में से चार विधायक राजद में शामिल हो गए थे। इन घटनाओं ने दोनों दलों के रिश्तों में दूरी पैदा की थी।
ऐसी स्थिति में जीत का कोटा भी कम हो जाएगा और एनडीए के पांचों उम्मीदवारों की जीत का रास्ता लगभग साफ हो सकता है। इस बीच दोनों पक्ष अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश में लगे हैं। एनडीए की ओर से उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा पटना में डेरा डाले हुए सहयोगी दलों के नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। वहीं राजद के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी भी अतिरिक्त वोटों की तलाश में सक्रिय हैं और बसपा तथा एआईएमआईएम के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।




