रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को एक निश्चित दुकान से ही किताबें और कॉपियां खरीदने के लिए मजबूर करने का एक गंभीर मामला सामने आया है।
इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए, जिला शिक्षा विभाग ने तीन प्रमुख निजी स्कूलों को ‘अंतिम चेतावनी’ जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल प्रशासन ने अपने रवैये में सुधार नहीं किया, तो संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), रायगढ़ ने वैदिक इंटरनेशनल स्कूल, ओपी जिंदल स्कूल, तमनार, और ओपी जिंदल स्कूल, रायगढ़ को आधिकारिक नोटिस जारी कर अंतिम चेतावनी दी है।
इन स्कूलों पर आरोप है कि वे अभिभावकों पर एक विशेष पुस्तक दुकान से ही पाठ्यपुस्तकें और संस्था के नाम से मुद्रित कॉपियां खरीदने का दबाव बना रहे हैं, जो शिक्षा विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन है।यह मामला इसलिए और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि जिला प्रशासन ने पहले ही सभी निजी स्कूलों के संचालकों की बैठक बुलाकर स्पष्ट निर्देश दिए थे।
रायगढ़ जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर से सख्त हिदायत दी गई थी कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताब या कॉपी खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि स्कूलों द्वारा निर्धारित सभी किताबें और कॉपियां जिले की विभिन्न पुस्तक दुकानों में उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी उन्हें खरीद सकें।
रायगढ़ जिले में कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि कुछ बड़े निजी स्कूल बुक सेंटर संचालकों के साथ कथित तौर पर मिलीभगत कर किताबों और कॉपियों की बिक्री करवा रहे हैं। अभिभावकों को डराया जाता है कि वे केवल निर्धारित दुकान से ही किताबें खरीदें, अन्यथा बच्चों को कक्षा में पढ़ाई के दौरान दिक्कत होगी। इसके अलावा, कुछ स्कूल संस्था के नाम से मुद्रित कॉपियां भी बेच रहे हैं, जिन्हें खरीदना छात्रों के लिए अनिवार्य बना दिया जाता है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
शिक्षा को व्यापार बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल प्रशासन चेतावनी के बाद भी अपने तरीके में सुधार नहीं करता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा को व्यापार बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना जरूरी है, इसलिए निजी स्कूलों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।




