वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे बड़े और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी सावित्री अपने संकल्प और पतिव्रत से यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थीं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि इस दिन जो भी महिला बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। ऐसे में आइए इस दिन से जुड़े उपायों को जानते हैं।
कच्चे सूत की 108 परिक्रमा
वट सावित्री के दिन बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा करते समय अपने मन में पति की लंबी उम्र और उनकी सफलता की प्रार्थना करें। माना जाता है कि ऐसा करने से पति के जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
सुहाग पिटारी का दान
पूजा के बाद किसी ब्राह्मण महिला या सुहागिन महिला को सुहाग की सामग्री जैसे कि लाल साड़ी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और काजल दान करें। दान करने से पहले इन चीजों को मां गौरी के चरणों में जरूर चढ़ाएं। इस उपाय को करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी क्लेश खत्म होते हैं।



