हिंदू धर्म में शादी को एक पवित्र संस्कार माना जाता है। इस संस्कार की सबसे महत्वपूर्ण रस्म है सप्तपदी यानी सात फेरे और उनके साथ लिए जाने वाले सात वचन। अग्नि को साक्षी मानकर दिए जाने वाले ये वचन पति-पत्नी के जीवन का मार्गदर्शक होते हैं।
अक्सर लोग इन वचनों को ध्यान से नहीं सुन पाते, लेकिन सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इनका मतलब समझना बहुत जरूरी है, तो आइए एस्ट्रोलॉजर चंद्रेश शर्मा जी से जानते हैं कि अग्नि के फेरे लेते समय वर और वधू एक-दूसरे को कौन से सात वचन देते हैं?
विवाह के वो 7 वचन और उनका मतलब
- प्रथम वचन – कन्या कहती है कि अगर आप कभी तीर्थ यात्रा पर जाएं, कोई व्रत करें या धार्मिक काम करें, तो मुझे अपने वाम अंग यानी बाएं में स्थान दें। यह वचन साथ मिलकर आध्यात्मिक उन्नति करने का प्रतीक है।
- द्वितीय वचन – कन्या मांगती है कि जैसे आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, वैसे ही मेरे परिवार का भी सम्मान करेंगे। यह घर की मर्यादा और परिवार की एकता का वचन है।
- तृतीय वचन – इसमें कन्या कहती है कि जीवन के हर समय में आप मेरा साथ निभाएंगे और परिवार की जिम्मेदारी उठाएंगे।
- चतुर्थ वचन – कन्या वचन मांगती है कि अब तक आप परिवार की मुश्किलों से मुक्त थे, लेकिन अब घर की जिम्मेदारी हम मिलकर उठाएंगे। आप घर के कामों में मेरी सलाह को महत्व देंगे।
- पंचम वचन – इसमें कन्या कहती है कि घर के लेन-देन, धन खर्च और निवेश के मामलों में आप मेरी राय जरूर लेंगे।
- षष्ठम वचन – इस वचन में कन्या कहती है कि अगर वह समाज में बैठी हो, तो पति वहां उसका अपमान नहीं करेगा। यह आपसी सम्मान और गरिमा की रक्षा का वादा है।
- सप्तम वचन – अंतिम वचन में कन्या मांगती है कि आप अन्य स्त्रियों को माता या बहन की नजर से देखेंगे और हमारे बीच किसी तीसरे को नहीं आने देंगे।
इनके बिना क्यों अधूरा है विवाह?ये सात वचन असल में एक सफल वैवाहिक जीवन का मंत्र हैं। अगर पति-पत्नी इन वचनों का मतलब समझकर पालन करें, तो आपसी कलह कभी न हो । ये वचन एक-दूसरे को अधिकार नहीं, बल्कि सम्मान देना सिखाते हैं।
इसमें उन्हें एक-दूसरे पर भरोसा रखने, प्यार निभाने, धीरज रखने और एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहने का वचन दिया जाता है। साथ ही परिवार का ख्याल रखने और खुशहाली के लिए मिलकर साथ चलने का संकल्प दिलाया जाता है। इन वचनों को निभाने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और परिवार की इज्जत भी बढ़ती है।



