हिंदू धर्म में वट यानी बरगद के वृक्ष को अक्षय माना गया है, जिसका कभी अंत नहीं होता। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने इसी वृक्ष के नीचे अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रत धर्म से यमराज को विवश कर दिया था और अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थीं। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए बरगद की पूजा करती हैं।
वहीं, इस पूजा का सबसे अहम हिस्सा है बरगद की परिक्रमा के दौरान 7 बार कच्चा सूत बांधना। कहते हैं कि इसके साथ ही पूजा पूर्ण मानी जाती है, तो इस आर्टिकल में इसके महत्व को समझते हैं।
7 बार सूत बांधने का धार्मिक महत्व
त्रिदेवों का वासशास्त्रों के अनुसार, बरगद के वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास होता है, जब महिलाएं वृक्ष पर सूत लपेटती हैं, तो वे एक तरह से त्रिदेवों को साक्षी मानकर अपने सुहाग की रक्षा का वचन मांगती हैं। यह धागा एक रक्षा सूत्र की तरह काम करता है।



