माना जाता है कि पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की आराधना और उनके मंत्रों के जप करने से साधक को 100 गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। इस साल ज्येष्ठ मलमास (अधिकमास) का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। ऐसे में आप इस माह में अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जप करके भी लाभ पा सकते हैं।
- मेष राशि – मलमास में आप ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायणाय नम: मंत्र का जप करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
- वृषभ राशि – इस राशि के जातक पुरुषोत्तम मास में ॐ गोपालाय उत्तरध्वजाय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं।
- मिथुन राशि – अधिक मास में मिथुन राशि के जातक ॐ क्लीं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
- कर्क राशि – कर्क राशि के जातक ॐ ह्रीं हिरण्यगर्भाय अव्यक्तरूपिणे नम: मंत्र का जप करके लाभ पा सकते हैं।
- सिंह राशि – इस राशि के जातक ॐ क्लीं ब्राह्मणे जगदाधाराय नम: मंत्र का जप करके प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
- कन्या राशि – आपको पुरुषोत्तम मास ॐ पीं पिताम्बराय नम: मंत्र का जप करने से लाभ मिल सकता है।
- तुला राशि – तुला राशि वालों को लाभ के लिए ॐ तत्वनिरंजनाय तारक रामाय नम:
- वृश्चिक राशि – आपको इस पवित्र अवधि में ॐ नारायणाय सूरसिंहाय नम: मंत्र का जप करने से विशेष लाभ मिल सकता है।
- धनु राशि – धनु राशि के जातक मलमास में ॐ श्रीं देवकृष्णाय ऊर्ध्वजाय नम: मंत्र का जप करके प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
- मकर राशि – मकर राशि वालों को ॐ श्रीं वत्सलाय नम: मंत्र का जप करने से लाभ मिलेगा।
- कुंभ राशि – आपको इस अवधि में ॐ श्रीं उपेन्द्राय अच्युताय नम मंत्र का जप करना चाहिए।
- मीन राशि – मीन राशि के जातक पुरुषोत्तम मास की विशेष अवधि में ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नम: मंत्र का जप करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
क्या करें और क्या नहीं
- इस अवधि में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या विष्णु सहस्रनाम का पाठ और सत्यनारायण व्रत कथा सुनना विशेष फलदायी होता है।
- इस पूरे महीने भगवान विष्णु के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- श्रीमद्भागवत महापुराण और भगवद्गीता का नियमित पाठ करें या श्रवण करें।
- जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार वस्त्र, फल, अन्न, जल से भरे घड़े, आदि का दान करें।
- मलमास में विवाह, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार, नए घर का गृह प्रवेश और वास्तु पूजा जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
- इस अवधि में मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, नशीले पदार्थ और बासी भोजन का त्याग करें। केवल शुद्ध और सात्विक भोजन ही करें।
- इस अवधि में किसी नए व्रत का संकल्प या शुरुआत करना या फिर किसी चल रहे व्रत का उद्यापन करना शुभ नहीं माना जाता।



