बिलासपुर: शहर के अपोलो अस्पताल की लापरवाही से पूर्व मेयर और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला की मौत के बाद अब एयर एम्बुलेंस में लापरवाही के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस की आंदोलन की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आया और अपोलो हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
शहर के अपोलो अस्पताल में पिछले दो दिनों से चल रहे विवाद के बीच स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। रायपुर और बिलासपुर से पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम अस्पताल में व्यापक जांच कर रही है।जांच टीम अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेज, भर्ती और उपचार की प्रक्रिया, चिकित्सा रिकॉर्ड के साथ-साथ अस्पताल के आय-व्यय का भी बारीकी से परीक्षण कर रही है। अधिकारियों द्वारा विभिन्न विभागों के दस्तावेजों का मिलान कर आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
गौरतलब है कि पिछले दो दिनों से अपोलो अस्पताल लगातार विवादों में बना हुआ है। मरीजों के उपचार और एंबुलेंस व्यवस्था में कथित लापरवाही के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। इधर, कांग्रेसी नेताओं ने भी अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानिए क्या है पूरा मामला
अपोलो अस्पताल में भर्ती एक गंभीर मरीज को हैदराबाद रेफर करने की प्रक्रिया के दौरान अस्पताल प्रबंधन पर कथित लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। मरीज के परिजनों का दावा है कि समय पर समुचित चिकित्सा समन्वय नहीं होने के कारण एयर एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को उसी दिन हैदराबाद नहीं भेजा जा सका। इससे मरीज की हालत और गंभीर हुई।
पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल लगभग 12 दिन पहले दोस्तों के साथ कोलकाता घूमने गए थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत खराब होने लगी। बिलासपुर लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर चार दिन पहले उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार दोपहर डाक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद स्वजन ने लगभग 13 लाख रुपये खर्च कर हैदराबाद के लिए एयर एंबुलेंस बुक की, जो बुधवार शाम करीब सात बजे चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच गई।
आरोप है कि मरीज को एयरपोर्ट ले जाने के लिए अस्पताल की एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। अस्पताल परिसर में एंबुलेंस होने के बावजूद उन्हें निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। साथ ही मरीज के साथ अस्पताल की ओर से न तो कोई डाक्टर भेजा गया और न ही कोई प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद था। एयरपोर्ट पहुंचने पर मरीज की तबीयत बिगड़ गई, डाॅक्टरों की टीम ने हैदराबाद ले जाने से इनकार कर दिया। इस वजह से मरीज को वापस अपोलो लाना पड़ा।
देर रात अस्पताल में चिकित्सकों ने मरीज के लिए विशेष फेफड़ा (लंग्स) सपोर्ट सिस्टम और नई विशेषज्ञ मेडिकल टीम की आवश्यकता बताई। गुरुवार को सुबह हैदराबाद से तीन सदस्यीय टीम अपोलो पहुंची। पूरे दिन मरीज को स्थिर करने के बाद शाम करीब सात बजे उसे दोबारा एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रवाना किया गया। हालांकि इस बार भी निजी एंबुलेंस का इस्तेमाल किया गया, लेकिन हैदराबाद से आई टीम ने पहले एंबुलेंस और उसकी चिकित्सा व्यवस्था की जांच की, उसके बाद ही मरीज को एयरपोर्ट ले जाने की अनुमति दी।
इलाज का खर्च बढ़कर 23 लाख रुपए तक पहुंचा
अस्पताल में चार दिनों के इलाज पर अब तक 2.87 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा एयर एंबुलेंस बुकिंग पर 13 लाख रुपये, एक दिन अतिरिक्त रुकने के कारण करीब दो लाख रुपये का हैंडलिंग चार्ज तथा विशेष मेडिकल टीम और उन्नत उपकरण बुलाने पर लगभग सात लाख रुपये अतिरिक्त खर्च हुए। इस तरह कुल खर्च करीब 23 लाख रुपये तक पहुंच गया।



