डोंगरगढ़: कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर डोंगरगढ़ में आयोजित गोविंदा उत्सव इस बार सिर्फ भव्य आयोजन ही नहीं, बल्कि बेहद सटीक पुलिस व्यवस्था और ‘जीरो-इंसिडेंट’ मॉडल के लिए भी चर्चा में रहा। करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी, शोभायात्रा, अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम और देर रात तक चले उत्सव के बावजूद कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
पुलिस की इस सफलता के पीछे घटना के बाद कार्रवाई के बजाय घटना से पहले उसे रोकने की रणनीति अहम रही। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर आयोजन से करीब एक सप्ताह पहले ही सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं।
पहले से तैयारी, मैदान में 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी
पुलिस ने आयोजन समिति, डीजे और साउंड संचालकों समेत संबंधित लोगों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद प्रमुख चौक-चौराहों, शोभायात्रा मार्ग और कार्यक्रम स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया।
पूरे आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था में 300 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार भीड़ के बीच सक्रिय रहीं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती रहीं।
भीड़ के बीच तलाशी, कड़े और धारदार हथियार जब्त
पुलिस की प्रिवेंटिव पुलिसिंग का असर आयोजन से पहले और आयोजन के दौरान साफ दिखाई दिया। भीड़ के बीच तलाशी और निगरानी के दौरान पुलिस ने करीब दो बड़े बोरों में कड़े जब्त किए। इसके अलावा कई धारदार हथियार भी बरामद किए गए।
पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया कि धार्मिक आयोजन की आड़ में उपद्रव या हिंसा करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अवैध शराब के कारोबार पर भी शिकंजा
गोविंदा उत्सव से पहले पुलिस ने क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी अभियान चलाया। लगातार निगरानी और कार्रवाई के चलते अवैध शराब बेचने वालों पर दबाव बना रहा।
पुलिस की सख्ती के कारण उत्सव के दौरान शराब के चलते विवाद और हुड़दंग की आशंका पर भी काफी हद तक अंकुश लगा। इसका सीधा असर आयोजन के माहौल पर दिखाई दिया और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में उत्सव का आनंद लिया।
महिला पुलिस अधिकारियों की भी अहम भूमिका
पूरे आयोजन के दौरान एसपी अंकिता शर्मा और डोंगरगढ़ की प्रशिक्षु डीएसपी सुमन जायसवाल की मैदानी निगरानी भी खास तौर पर नजर आई। महिला अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने भीड़ के बीच सक्रिय रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी और जरूरत के मुताबिक तत्काल कार्रवाई की।
पुलिस की पूरी रणनीति का मूल मंत्र साफ रहा—वारदात का इंतजार नहीं, बल्कि वारदात की संभावना को ही खत्म करना।
वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार मैदान में रहे
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर, एसडीओपी केसरी नंदन नायक, नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन, डीएसपी एंब्रोस कुजूर, केके बाजपेयी, सतानंद विंध्यराज और डीएसपी सुमन जायसवाल सहित विभिन्न थाना और चौकी प्रभारी लगातार मैदान में मौजूद रहे।
पुलिस टीमों ने शोभायात्रा मार्ग, प्रमुख चौक-चौराहों और कार्यक्रम स्थलों पर निगरानी रखते हुए भीड़ और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया।
50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु, फिर भी शांतिपूर्ण रहा उत्सव
धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले डोंगरगढ़ में गोविंदा उत्सव के दौरान आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में हजारों लोगों की भीड़ के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती रहती है।
इस बार पुलिस ने सिर्फ बल तैनाती पर निर्भर रहने के बजाय पूर्व तैयारी, संदिग्धों की निगरानी, हथियारों की जब्ती, अवैध शराब पर कार्रवाई और लगातार मैदानी पुलिसिंग को प्राथमिकता दी।
नतीजा यह रहा कि 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ और देर रात तक चले कार्यक्रम के बावजूद कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। डोंगरगढ़ पुलिस के लिए यह सफल आयोजन अब अपराध और उपद्रव के खिलाफ अपनाई गई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के प्रभावी उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।



