नई दिल्ली : दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने MCD और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अधिकारियों से पूछा कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मलबे में फंसे लोगों को जल्द बचाने के लिए राहत और बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। हाईकोर्ट ने खास तौर पर PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
‘50 छात्रों की जान दांव पर लगी है’
हाईकोर्ट ने कहा कि करीब 50 छात्रों की जान दांव पर लगी है और कुछ छात्र अभी भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। अदालत ने सवाल किया कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि लोगों की जान बचाने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। कोर्ट ने अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने और हर संभव तरीके से लोगों की जान बचाने पर जोर दिया।
सिर्फ बिल्डिंग मालिक जिम्मेदार नहीं- हाईकोर्ट
अदालत ने कहा कि किसी इमारत के गिरने जैसी घटना के लिए केवल भवन मालिक को जिम्मेदार ठहराकर सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। संबंधित विभागों को कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना होगा।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि सरकारी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों की सही जानकारी हो और वे समय पर उनका निर्वहन करें, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
PG-हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि हादसे वाली इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे और इनमें कई छात्र दिल्ली से बाहर के थे। दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की सीमित संख्या के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को PG में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
अदालत ने PG और हॉस्टल की निगरानी और नियमों को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में दो मंजिल की अनुमति लेकर उससे कई अधिक मंजिलें बना दी जाती हैं, जबकि भवन की नींव उसी क्षमता की होती है। ऐसी स्थिति गंभीर हादसों का कारण बन सकती है।
एक हफ्ते में PG-हॉस्टल का ऑडिट
हाईकोर्ट ने MCD को एक सप्ताह के भीतर दिल्ली में संचालित PG और हॉस्टल का ऑडिट करने का निर्देश दिया है। MCD को यह भी बताना होगा कि PG के संचालन को लेकर कौन से नियम लागू हैं और इन स्थानों पर कितने छात्र रह रहे हैं।
इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से भी जानकारी मांगी है कि दिल्ली से बाहर के कितने छात्र विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हैं और उनके लिए कितने हॉस्टल उपलब्ध हैं।
अधिकारियों को यह भी पता लगाने का निर्देश दिया गया है कि जिन इमारतों में छात्र रह रहे थे, उन्हें आवश्यक मंजूरी मिली थी या नहीं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य लोगों की जानकारी भी अदालत को देनी होगी।
MCD और पुलिस ने रेस्क्यू तेज करने का भरोसा दिया
सुनवाई के दौरान MCD और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि बचाव अभियान में हर संभव कदम उठाया जा रहा है। कोर्ट ने इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लिया और उम्मीद जताई कि रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाएगा।
अदालत ने संबंधित पक्षों से अलग-अलग जवाब मांगा है और मामले में 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत
बता दें कि रविवार को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी। बताया जा रहा है कि हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।
इमारत के ऊपरी हिस्से में PG संचालित था, जहां कई छात्र रहते थे। रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
बिल्डिंग मालिक हिरासत में
हादसे के बाद फरार चल रहे बिल्डिंग मालिक हरिराम को दिल्ली पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी से हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद से ही उसकी तलाश की जा रही थी। अब उसे अदालत में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है।
पांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई
घटना के बाद दिल्ली सरकार ने भी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर लापरवाही के आरोप में MCD साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार को निलंबित किया गया है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, भवनों की वैधता और निर्माण मानकों की निगरानी को लेकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद है।



