हार्ट अटैक की स्थिति में घबराहट स्वाभाविक है, लेकिन इस दौरान सही कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में तकलीफ, अचानक पसीना, मितली, जबड़े या हाथ में दर्द जैसे लक्षण नजर आएं तो इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी कदम है कि तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता ली जाए।
मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट एवं ग्रुप हेड-कैथ लैब्स डॉ. समीर गुप्ता के मुताबिक, हार्ट अटैक के शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मरीज के उपचार और रिकवरी की संभावना बेहतर हो सकती है।
सीने में दबाव, हाथ या जबड़े में दर्द हो तो रहें सतर्क
अचानक सीने में तेज दर्द या दबाव महसूस होना, दर्द का हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक जाना, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मितली या चक्कर आना हार्ट अटैक के संभावित संकेत हो सकते हैं। हालांकि हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
ऐसे लक्षण होने पर यह सोचकर इंतजार नहीं करना चाहिए कि परेशानी गैस या हार्टबर्न की वजह से है। तुरंत एंबुलेंस या स्थानीय आपातकालीन सेवा को फोन करना सबसे पहला कदम होना चाहिए।
एंबुलेंस आने तक क्या करें?
1. तुरंत आपातकालीन सहायता लें
लक्षण शुरू होते ही एंबुलेंस बुलाएं। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल ले जाने के बजाय संभव हो तो मेडिकल इमरजेंसी सेवा का इस्तेमाल करें। इससे रास्ते में भी जरूरी चिकित्सा सहायता मिल सकती है।
2. मरीज को आराम की स्थिति में रखें
मरीज को चलने-फिरने या शारीरिक मेहनत करने से रोकें। उसे आरामदायक स्थिति में बैठाएं या ऐसी अवस्था में रखें जिसमें उसे सांस लेने में आसानी हो। तंग कपड़े ढीले किए जा सकते हैं।
3. एस्पिरिन को लेकर सावधानी जरूरी
कुछ हार्ट अटैक के मामलों में डॉक्टर एस्पिरिन की सलाह दे सकते हैं, लेकिन इसे हर व्यक्ति को अपनी तरफ से लेना सुरक्षित नहीं है। एस्पिरिन से एलर्जी, सक्रिय रक्तस्राव, कुछ प्रकार के स्ट्रोक या अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में नुकसान हो सकता है। इसलिए आपातकालीन सेवा/डॉक्टर से फोन पर पूछकर ही इसे लिया जाना चाहिए। केवल इस उम्मीद में एंबुलेंस बुलाने में देरी नहीं करनी चाहिए कि एस्पिरिन लेने से समस्या ठीक हो जाएगी।
4. मरीज को अकेला न छोड़ें
परिजन या आसपास मौजूद व्यक्ति मरीज के साथ रहें और उसकी स्थिति पर नजर रखें। यदि मरीज बेहोश हो जाए और सांस सामान्य रूप से न ले रहा हो, तो आपातकालीन सेवा के निर्देश के अनुसार सीपीआर शुरू करने की जरूरत पड़ सकती है।
महिलाओं में अलग तरह से दिख सकते हैं लक्षण
हार्ट अटैक के लक्षण महिलाओं में हमेशा पारंपरिक सीने के दर्द तक सीमित नहीं होते। अत्यधिक या असामान्य थकान, सांस लेने में परेशानी, मितली, चक्कर, पीठ या कंधे के बीच दर्द जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
इसलिए महिलाओं में ऐसे नए या असामान्य लक्षणों को केवल थकान, तनाव या गैस मानकर टालना उचित नहीं है।
सबसे जरूरी बात: इलाज में देरी न करें
हार्ट अटैक में समय पर अस्पताल पहुंचना महत्वपूर्ण है। लक्षण कितनी देर से शुरू हुए, यह जानकारी डॉक्टरों को जरूर बताएं। मरीज को खुद से कई दवाएं देने या घरेलू उपाय आजमाने के बजाय तुरंत मेडिकल सहायता लेना प्राथमिकता होनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति को अचानक सीने में तेज दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, बेहोशी या शरीर के किसी हिस्से में अचानक गंभीर तकलीफ हो रही है, तो इसे आपात स्थिति मानकर तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें।



