रायपुर : छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कर-कमलों से सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामनाम ही जिनका धर्म और रामभक्ति ही जिनका कर्म है, ऐसे पवित्र रामनामी समुदाय की आस्था और साधना की अपनी विशिष्ट पहचान है। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से इस समुदाय की परंपरा, आस्था और जीवनशैली को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया है।
तन पर अंकित ‘राम’ आस्था की पहचान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रामनामी समुदाय के लोगों के तन पर अंकित ‘राम’ केवल एक अक्षर नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही अटूट आस्था, साधना और समर्पण की पहचान है।
उन्होंने कहा कि राम के नाम को समर्पित इस समुदाय की विशिष्ट जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपराओं को डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ के माध्यम से व्यापक मंच मिला है। फिल्म ने छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी प्रेरणादायी है।
निर्देशक भरतबाला गणपति समेत पूरी टीम को बधाई
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि के लिए फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति और ‘राम-नामी’ की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने वाली यह फिल्म छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि ऐसे प्रयास छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



