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राहुल गांधी ने उठाया एंटी-इनकम्बेंसी का सवाल, BJP ने याद दिलाया कांग्रेस का पुराना चुनावी रिकॉर्ड

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नई दिल्ली : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के एंटी-इनकम्बेंसी से जुड़े सवालों पर कांग्रेस के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए निशाना साधा।

राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की भूमिका और SIR को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि चुनावों में गड़बड़ी हो रही है और यह भी सवाल उठाया कि हाल के चुनावों में बीजेपी के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी क्यों दिखाई नहीं दे रही है।

इसके जवाब में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय राजनीति में एंटी-इनकम्बेंसी कोई नई बात नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के खिलाफ भी लंबे समय तक सत्ता-विरोधी रुझान देखने को मिला है।

कांग्रेस के चुनावी इतिहास का दिया हवाला

सुधांशु त्रिवेदी ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि 1967 के बाद कांग्रेस तमिलनाडु में सत्ता में वापस नहीं आई, जबकि उस समय बीजेपी का अस्तित्व भी नहीं था। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि 1977 से 2011 तक राज्य में वाम मोर्चे का शासन रहा।

बीजेपी नेता ने कहा कि इन उदाहरणों को भी भारतीय राजनीति में एंटी-इनकम्बेंसी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले दौर का जिक्र करते हुए उस समय के चुनावों में बूथ कैप्चरिंग और हिंसा जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया।

‘सत्ता-विरोधी भावना कांग्रेस के अंदर’

सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में सत्ता-विरोधी भावना कांग्रेस के भीतर ही दिखाई दे रही है। उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक प्रभाव और चुनावी प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने रायबरेली और अमेठी में कांग्रेस की जीत तथा समाजवादी पार्टी के समर्थन का जिक्र किया। साथ ही वायनाड में कांग्रेस नेताओं की जीत के संदर्भ में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के समर्थन की बात कही। ये टिप्पणियां बीजेपी नेता के राजनीतिक दावे हैं।

SIR और चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल

सुधांशु त्रिवेदी ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्टों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी खबर में किसी संबंधित व्यक्ति का बयान या प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है, तो उस दावे का आधार स्पष्ट होना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि किसी चुनाव आयुक्त का प्रत्यक्ष बयान सामने नहीं आया है, तो आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़े दावों का आधार क्या है। इस बीच, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है और कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान लिखित टिप्पणियां या अलग-अलग विचार प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं।

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

राहुल गांधी ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और SIR तथा चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एंटी-इनकम्बेंसी को लोकतांत्रिक राजनीति की सामान्य प्रक्रिया बताते हुए सवाल किया कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में यह प्रभाव क्यों दिखाई नहीं देता।

इस तरह SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एंटी-इनकम्बेंसी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।