रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गौ माता की सुरक्षा, चारा-पानी की व्यवस्था और गौठानों की स्थिति को लेकर साधु-संतों, किन्नर अखाड़ा और गौठान संचालकों ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम मुख्यालय का घेराव कर परिसर के सामने गोबर डालकर विरोध जताया। उन्होंने गौठानों में अव्यवस्थाओं, मवेशियों की बढ़ती संख्या और संचालक संस्थाओं के लंबित भुगतान का मुद्दा उठाते हुए व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गौठानों में क्षमता से अधिक मवेशी रखे जा रहे हैं। पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिलने से गौवंश की देखभाल प्रभावित हो रही है, जबकि शहर की सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों के दुर्घटनाओं का शिकार होने की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
‘गौ माता को चारा और रहने का अधिकार चाहिए’
किन्नर अखाड़ा की सौम्या महामंडलेश्वर ने कहा कि गौ माता के नाम पर राजनीति हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार आवेदन दिए गए और अधिकारियों के साथ चर्चा भी हुई, लेकिन समस्याएं बनी हुई हैं।
उनके मुताबिक, कुछ गौठानों की निर्धारित क्षमता करीब 250 मवेशियों की है, जबकि वहां 500 से लेकर 800 से अधिक पशु होने की बात सामने आई है। सीमित जगह में अधिक मवेशियों को रखने से उनकी सुरक्षा और देखभाल प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि गौवंश के लिए पर्याप्त जगह, भोजन और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
‘पहली रोटी गाय को, लेकिन यहां सारी रोटी अंदर हो रही है’
छत्तीसगढ़ संत समाज के प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरानंद महाराज ने प्रदर्शन के दौरान गौठानों की स्थिति और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार पहली रोटी गाय को दी जाती है, लेकिन मौजूदा हालात में गौ माता की देखभाल को लेकर गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि नगर पालिक निगम रायपुर के अंतर्गत संचालित गौठानों की स्थिति लगातार खराब होने की शिकायतें मिल रही हैं। शहर में आवारा मवेशियों की मौजूदगी बनी हुई है, वहीं गौठानों का संचालन करने वाली संस्थाओं को समय पर भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संचालकों के अनुसार, पिछले कई महीनों से भुगतान लंबित है। इसका असर सूखा और हरा चारा, दाना-पानी की व्यवस्था पर पड़ रहा है। पर्याप्त संसाधन नहीं मिलने से मवेशियों की देखभाल करना मुश्किल हो रहा है।
कर्मचारियों और चरवाहों का मानदेय भी प्रभावित
गौठान संचालकों का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण कर्मचारियों और चरवाहों को मानदेय देने में भी परेशानी आ रही है। उनका आरोप है कि आवश्यक सुविधाओं और आर्थिक सहायता के अभाव में गौठानों का संचालन करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने महापौर और नगर निगम आयुक्त से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लंबित भुगतान नहीं किया गया और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो गौठान संचालन बंद करने के साथ उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
260 मवेशियों का टेंडर, गौठान में 590 गौवंश होने का दावा
फुंडहर गौठान के संचालक विक्रांत शर्मा ने नगर निगम आयुक्त को संबोधित करते हुए अपनी संस्था की समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि उनके गौठान में वर्तमान में लगभग 590 गौवंश संरक्षित हैं, जबकि निगम की ओर से केवल 260 पशुओं के लिए टेंडर हुआ था।
विक्रांत शर्मा के मुताबिक, जोन-9 में मवेशियों की संख्या बढ़ने के कारण काउ कैचर के माध्यम से अतिरिक्त पशुओं को गौठान तक लाया गया, लेकिन इन अतिरिक्त मवेशियों के रखरखाव का भुगतान नहीं हो रहा है। उन्होंने अतिरिक्त शेड के लिए मिली सहायता राशि और तिरपाल के सहारे की गई अस्थायी व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
संचालक ने तीन दिनों के भीतर बकाया भुगतान करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए तो गौवंश की देखभाल और गौठान संचालन की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब प्रदर्शनकारियों की मांगों पर नगर निगम की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।



