रायपुर : छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों की लंबित मांगों और विभिन्न समस्याओं को लेकर सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ चिकित्सकीय संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA), छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) और छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) के प्रदेश अध्यक्षों के साथ स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय (DHS) के वरिष्ठ उप संचालक शामिल हुए। बैठक में बॉन्ड चिकित्सकों की वेतनवृद्धि, प्री-पीजी परीक्षा से संबंधित मॉर्गेज हटाने, चिकित्सकीय पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना और निलंबन सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। चिकित्सकीय संगठनों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बॉन्ड चिकित्सकों की वेतनवृद्धि और मॉर्गेज हटाने की मांग
बैठक की शुरुआत में JDA के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव और CGDF के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने UG एवं PG बॉन्ड चिकित्सकों की वेतनवृद्धि और प्री-पीजी परीक्षा से संबंधित मॉर्गेज हटाने की लंबित मांगों को स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखा।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन विषयों पर प्रक्रिया जारी है। उन्होंने चिकित्सकीय संगठनों को वित्त विभाग और विधि विभाग के समक्ष भी अपना पक्ष रखने तथा नियमित रूप से फॉलोअप करने की सलाह दी। मंत्री ने कहा कि संबंधित विभागों से लगातार संपर्क बनाए रखने से फाइलों की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
चिकित्सकीय पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्ति का विरोध
बैठक में चिकित्सकीय संगठनों ने संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं (DHS) और संचालनालय चिकित्सा शिक्षा (DME) में चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्तियां और पदस्थापनाएं निरस्त करने की मांग की।
संगठनों ने कहा कि इन पदों पर भर्ती नियमों, संवर्गीय पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर योग्य वरिष्ठ चिकित्सकीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, ताकि चिकित्सकों के पदोन्नति अधिकारों और प्रशासनिक हितों का संरक्षण हो सके।
28 अक्टूबर को हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई, उससे पहले आदेश जारी होने की संभावना
चिकित्सकीय संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि DHS और DME में अपर संचालक, संयुक्त संचालक, संचालक तथा RMA से संबंधित पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रकरण विचाराधीन हैं। इन मामलों में 28 अक्टूबर 2026 को अंतिम सुनवाई निर्धारित है।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि 28 तारीख को हाईकोर्ट की फाइनल हियरिंग से पहले ही अगर सरकार आपके पक्ष में आदेश जारी कर दे, तो कैसा रहेगा?
मंत्री की इस सकारात्मक मंशा का बैठक में मौजूद चिकित्सकीय संगठनों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ चिकित्सकीय अधिकारियों ने स्वागत किया।
डॉ. धर्मेन्द्र गहवई के निलंबन का मुद्दा भी उठा
बैठक में डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन का मामला भी उठाया गया। चिकित्सकीय संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि डॉ. गहवई उन चिकित्सकीय अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
संगठनों ने चिंता जताई कि न्यायालय में अपने संवर्गीय अधिकारों के संरक्षण के लिए याचिका दायर करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई को वे प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के रूप में देखेंगे।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “मैं डॉ. धर्मेन्द्र गहवई के निलंबन की फाइल व्यक्तिगत रूप से मंगवाकर देखता हूं।” स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि “किसी भी याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी, मैं इसका आश्वासन देता हूं।”
मांगों के समाधान के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखेंगे संगठन
बैठक के बाद JDA, CGDF और CIDA ने चिकित्सकों के संवर्गीय अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति, बॉन्ड चिकित्सकों के हितों और न्यायालय में याचिका दायर करने वाले चिकित्सकों के संरक्षण के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने की बात कही। संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री के सकारात्मक रुख का स्वागत किया। साथ ही उम्मीद जताई कि लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।



