गरियाबंद: जिले के मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर देहारगुड़ा और खामभाठा गांव के बीच पैरी नदी पर वर्षों से अधूरा पड़ा पुल अब बच्चों और ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। लगातार बारिश के दौरान नदी में पानी बढ़ने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे भी जान जोखिम में डालकर अधूरे पुल को पार करने को मजबूर हैं।
मामले की खबर सामने आने के करीब छह दिन बाद संबंधित विभाग के अधिकारी निर्माण स्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों से चर्चा के बाद ठेकेदार को दिसंबर 2026 तक पुल निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोगों की आवाजाही के लिए अस्थायी रास्ता बनाने को कहा गया है।

हालांकि, अधिकारियों के निरीक्षण के बाद बनाया गया अस्थायी रास्ता भी अब सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों ने सेंट्रिंग प्लेटों को आपस में जोड़कर सीढ़ीनुमा रास्ता तैयार कर दिया है, जो आवाजाही के दौरान हिलता-डुलता है। इससे बच्चों और ग्रामीणों के लिए खतरा कम होने के बजाय नई परेशानी खड़ी हो गई है।
पहले पतली लोहे की सीढ़ी, अब सेंट्रिंग प्लेट का रास्ता
पुल निर्माण अधूरा होने के कारण बारिश के दिनों में ग्रामीणों के सामने नदी पार करने की समस्या बनी हुई है। पहले लोग करीब 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी के सहारे अधूरे पुल के हिस्से तक पहुंच रहे थे। इसके आगे भी अस्थायी इंतजाम के जरिए आवाजाही करनी पड़ रही थी।
स्कूली बच्चों के लिए यह स्थिति और चिंताजनक है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे रोजाना इसी जोखिम भरे रास्ते से स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं।
अब विभागीय अधिकारियों के निर्देश के बाद सेंट्रिंग प्लेटों को जोड़कर अस्थायी सीढ़ी बनाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता स्थिर नहीं है और चलते समय हिलता-डुलता है। इसी वजह से कई बच्चे एक साथ चलने के बजाय बैठकर नीचे उतरने को मजबूर हैं। ऐसे में पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने की स्थिति में गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
करोड़ों की लागत से बन रहा पुल, फिर भी सूचना पटल तक नहीं
ग्रामीणों के मुताबिक पैरी नदी पर यह पुल पिछले 4-5 वर्षों से निर्माणाधीन है। पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग द्वारा कराया जा रहा है, लेकिन काम की रफ्तार बेहद धीमी बताई जा रही है।
निर्माण स्थल पर कथित तौर पर अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट सूचना पटल नहीं लगाया गया है, जिससे लोगों को पुल की लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य की समयसीमा और अन्य जरूरी जानकारी मिल सके।
अब विभाग ने ठेकेदार को दिसंबर 2026 तक निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि तब तक बारिश के दौरान ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था कैसे होगी।
अधिकारी बोले- दिसंबर तक पूरा होगा निर्माण
लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग के ब्रिज एसडीओ एसके पंडोले ने बताया कि बड़े अधिकारियों की ओर से ठेकेदार को सख्त हिदायत दी गई है कि पुल का निर्माण दिसंबर तक पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि ठेकेदार दो दिन पहले ही कार्यस्थल पर पहुंचा है और लोगों की आवाजाही में सुविधा के लिए अस्थायी सीढ़ी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
विधायक जनक ध्रुव ने जताई नाराजगी
मामले को लेकर बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मामला सामने आने के बावजूद सरकार और प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। विधायक ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्र के ग्रामीणों और बच्चों को जोखिम उठाकर आवाजाही करनी पड़ रही है, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को अधूरे पुल की स्थिति और लोगों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्राम पंचायत के सरपंच महेश दीवान, पूर्व सरपंच डिगेश्वरी सांडे, पवन दीवान, सोहन नागेश सहित ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से अधूरा पड़ा पुल उनकी परेशानी का कारण बना हुआ है। बारिश के दौरान बच्चों और ग्रामीणों को जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था नहीं की गई और पुल निर्माण में तेजी नहीं लाई गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।



