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विजय माल्या ने ED पर लगाए बड़े आरोप, बोले- ‘मेरे जब्त फंड से कर्मचारियों को दिए गए 350 करोड़’

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भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जा चुके कारोबारी विजय माल्या ने एक बार फिर खुद को बेगुनाह बताते हुए भारत सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। माल्या ने सोशल मीडिया पर लगातार कई पोस्ट कर दावा किया कि उन्हें कानूनी तौर पर ब्रिटेन छोड़ने से रोका गया है और भारत लौटने को लेकर उनकी स्थिति को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके खिलाफ भारत में कानूनी कार्रवाई और उनकी वापसी का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2025 में तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA) के तहत कुल 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। इनमें विजय माल्या और नीरव मोदी समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं।

‘ब्रिटेन में रहना कानूनी मजबूरी का हिस्सा’

माल्या ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उन्हें भारत आने से इनकार करने वाला भगोड़ा कहना सही नहीं है। उनका कहना है कि वे 1992 से यूनाइटेड किंगडम के स्थायी निवासी हैं और मौजूदा कानूनी परिस्थितियों के कारण ब्रिटेन छोड़ नहीं सकते।

उन्होंने भारत सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके मामले में उनके साथ अन्याय किया गया है। हालांकि, ये सभी दावे माल्या की ओर से किए गए हैं।

ED की कार्रवाई और 350 करोड़ रुपये का दावा

माल्या ने मंगलवार को एक कथित हलफनामे का हिस्सा भी सोशल मीडिया पर साझा किया। उनका दावा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कर्ज और रिकवरी से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख किया गया है।

माल्या ने दावा किया कि वर्ष 2021 तक 14,131.60 करोड़ रुपये की रिकवरी दिखाई गई थी। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम की रिकवरी के बावजूद उन्हें अब भी धोखाधड़ी करने वाला और भगोड़ा क्यों कहा जा रहा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ED ने उनके जब्त किए गए फंड में से 350 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किंगफिशर के कर्मचारियों को भुगतान के लिए जारी की थी। माल्या का कहना है कि उनकी संपत्तियां और फंड जब्त होने के कारण वे स्वयं भुगतान करने की स्थिति में नहीं थे।

‘बैंकों ने ज्यादा रकम वसूल की’

माल्या इससे पहले भी बैंकों से हुई रिकवरी को लेकर सवाल उठा चुके हैं। अगस्त में उन्होंने दावा किया था कि बैंकों और सरकार ने कोर्ट के आदेश के तहत निर्धारित करीब 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज के मुकाबले 14,100 करोड़ रुपये की रिकवरी की है।

माल्या ने इसी आधार पर अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने पर सवाल उठाया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट में भी उठ चुका है मामला

विजय माल्या की ओर से भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की संवैधानिक वैधता और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई है।

फरवरी में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माल्या को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि कोई व्यक्ति जानबूझकर अदालती कार्यवाही से दूर रहकर अदालत से राहत की उम्मीद नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने का अवसर दिया था कि क्या माल्या भारत लौटना चाहते हैं।

चीफ जस्टिस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया था कि यदि माल्या अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कार्यवाही से बच रहे हैं, तो उन्हें अपनी याचिका में राहत मिलने में मुश्किल होगी।

सरकार का रुख क्या है?

भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह विदेशों में रह रहे वांछित भगोड़ों को भारत वापस लाने और उन्हें यहां की अदालतों में मुकदमे का सामना कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक ऐसे मामलों में कई कानूनी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, जिसके चलते प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

अब विजय माल्या के ताजा सोशल मीडिया दावों ने एक बार फिर उनकी भारत वापसी, बैंक रिकवरी और भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत चल रही कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है।