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सिर्फ 7-8 घंटे सोना ही काफी नहीं! कब सोते हैं आप, इसका भी दिल की सेहत से है कनेक्शन

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोने और जागने का समय लगातार बदलना आम बात हो गई है। देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का दबाव या रात की शिफ्ट के कारण कई लोगों की नींद का कोई निश्चित समय नहीं रहता। कुछ लोग रात 1-2 बजे तक जागते हैं और सुबह देर से उठते हैं।

हालांकि, नींद सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप रोज कितने घंटे सो रहे हैं। आप कब सोते हैं, कब जागते हैं और आपकी नींद कितनी नियमित है, ये बातें भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग की अतिरिक्त निदेशक इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी एवं हार्ट फेलियर प्रोग्राम की डॉ. राशि खरे के मुताबिक, लगातार अनियमित नींद शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है और लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।

क्या अनियमित नींद से दिल पर पड़ता है असर?

हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह नींद-जागने के चक्र समेत शरीर की कई प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है।

जब कोई व्यक्ति लगातार कभी जल्दी और कभी बहुत देर से सोता है, तो उसकी नींद की नियमितता प्रभावित हो सकती है। इससे नींद की गुणवत्ता के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, तनाव और मेटाबॉलिज्म जैसे कारकों पर भी असर पड़ सकता है।

लंबे समय तक खराब नींद और अनियमित स्लीप रूटीन का संबंध मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से देखा गया है। ये सभी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाने वाले कारक हो सकते हैं।

सिर्फ नींद के घंटे नहीं, नियमितता भी जरूरी

कई लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने 7-8 घंटे की नींद पूरी कर ली तो स्लीप रूटीन सही है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त अवधि के साथ-साथ नियमित और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद भी जरूरी है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति रोज रात 10:30 बजे सोता है और सुबह 6:30 बजे उठता है, लेकिन सप्ताहांत में अचानक रात 2 बजे सोकर सुबह 10 बजे उठने लगता है, तो उसके स्लीप पैटर्न में बड़ा बदलाव आ जाता है।

एक-दो दिन ऐसा होने से आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं है। समस्या तब बन सकती है जब अनियमित नींद लगातार जीवनशैली का हिस्सा बन जाए।

रात की शिफ्ट करने वालों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत

जिन लोगों की नौकरी में नियमित रूप से नाइट शिफ्ट होती है, उनके लिए नींद का रूटीन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी तरह देर रात तक जागने वाले और छुट्टियों में अपने सोने-जागने का समय काफी बदल देने वाले लोगों को भी अपनी स्लीप रूटीन पर ध्यान देना चाहिए।

ऐसे लोगों के लिए पर्याप्त नींद लेना और सोने-जागने का एक अपेक्षाकृत स्थिर पैटर्न बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

कैसे सुधारें अपना स्लीप रूटीन?

अपनी नींद को नियमित रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं—

रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।

सप्ताहांत में भी स्लीप शेड्यूल को बहुत ज्यादा न बदलें।

सोने से पहले मोबाइल और दूसरे स्क्रीन उपकरणों का इस्तेमाल कम करें।

देर शाम या रात में कैफीन का सेवन सीमित करें।

सोने से पहले भारी भोजन और बहुत ज्यादा उत्तेजक गतिविधियों से बचें।

कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखने की कोशिश करें।

स्वस्थ वयस्कों के लिए आमतौर पर 7-9 घंटे की नींद की जरूरत होती है, हालांकि व्यक्तिगत जरूरत अलग हो सकती है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए नींद को न करें नजरअंदाज

दिल की सेहत के लिए सिर्फ खान-पान और व्यायाम ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। पर्याप्त और नियमित नींद भी स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है। लगातार देर रात तक जागना और सोने-जागने का समय बार-बार बदलना लंबे समय में स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हो सकता है।

अगर नींद की समस्या लगातार बनी हुई है, बहुत ज्यादा खर्राटे आते हैं, सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होता है या दिनभर अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।