पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 26 सितंबर से होने जा रही है। हिंदू धर्म में यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए विशेष मानी जाती है। इस दौरान परिवार की परंपरा के अनुसार तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष के दौरान कुछ मांगलिक और व्यक्तिगत कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। ऐसे में अगर घर में कोई जरूरी काम लंबित है, तो उसे पितृ पक्ष शुरू होने से पहले पूरा कर लेना उचित माना जाता है।
हेयरकट और शेविंग का काम पहले निपटा लें
धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने और नाखून काटने जैसे कार्यों से परहेज करने की बात कही गई है। इसे साज-सज्जा से जुड़े कार्यों से दूरी रखने की परंपरा से जोड़ा जाता है।
ऐसे में यदि हेयरकट, शेविंग या पार्लर से संबंधित कोई जरूरी काम है, तो 26 सितंबर से पहले उसे पूरा किया जा सकता है।
शादी-ब्याह और दूसरे शुभ कार्य पहले कर लें
पितृ पक्ष के दौरान विवाह, सगाई, रोका, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक आयोजनों को आमतौर पर टालने की धार्मिक परंपरा बताई जाती है। इसी तरह कुछ लोग इस अवधि में नए काम या नए व्यवसाय की शुरुआत से भी बचते हैं।
अगर परिवार में ऐसा कोई कार्यक्रम पहले से तय है, तो उसकी तारीख और धार्मिक परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष शुरू होने से पहले आयोजन पूरा करने पर विचार किया जाता है।
पितृ पक्ष से पहले घर की सफाई कर लें
श्राद्ध पक्ष शुरू होने से पहले घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करने की भी परंपरा है। पूजा स्थल, रसोई, मुख्य द्वार और घर के दूसरे हिस्सों को व्यवस्थित कर लेना चाहिए।
घर में लंबे समय से पड़ा अनुपयोगी सामान, कबाड़, टूटे बर्तन या खराब वस्तुएं हों तो उन्हें भी पहले ही व्यवस्थित या बाहर कर देना बेहतर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध पक्ष के दौरान घर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
सूखे और मुरझाए पौधों को हटा दें
अगर घर के गमलों या आंगन में कोई पौधा पूरी तरह सूख गया है, तो उसे पितृ पक्ष शुरू होने से पहले हटाने की परंपरा कुछ परिवारों में मानी जाती है।
खास तौर पर सूखी तुलसी को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसी स्थिति में तुलसी को सामान्य पौधे की तरह फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक हटाने या जल में विसर्जित करने की परंपरा बताई जाती है।
पितृ पक्ष में क्यों किए जाते हैं श्राद्ध और तर्पण?
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की अवधि पूर्वजों को स्मरण करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान परिवार अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करता है।
धार्मिक मान्यता है कि पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किए गए कर्म से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं, पितृ कर्म से जुड़े नियमों की अनदेखी को लेकर पितृ दोष जैसी मान्यताएं भी प्रचलित हैं।
हालांकि, इन मान्यताओं और परंपराओं के नियम अलग-अलग परिवार, क्षेत्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए किसी विशेष कर्म या विधि के लिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय विद्वान/पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।



